🫀 Category: Relationships इक खालीपन था पहले, ज़िंदगी की राहों में कहीं, ढूँढता फिरता था दिल, अपनी मंज़िल थी नहीं। अधूरी सी कहानी थी, अनकही कोई दास्तान, जैसे कोई ख़्वाब था, पर ना था कोई निशाँ। फिर इक रोज़ तुम आए, जैसे कोई सुबह हसीं, रातों की ख़ामोशी में, जगी नई किरन कहीं। ना थी कोई ख़बर, ना कोई पहले से पहचान, पर तेरी एक नज़र से, बदला मेरा जहान। लफ़्ज़ों से परे थी वो, पहली सी मुलाक़ात अपनी, लगा जैसे बरसों से, मैं था तेरा ही इंतज़ार। तेरी आँखों में मैंने, देखी अपनी परछाई, रूह ने अपनी रूह को, पहचान लिया था उस रात। वो पल ठहरा सा था, जैसे थम गया हो ज़माना, जब दिल ने कहा 'मिल गया' मेरा सच्चा अफ़साना। एक ऐसी डोर बँधी, जो नाज़ुक भी थी और मज़बूत भी, जैसे दो किनारों को मिलाती, कोई बहती नदी। अब तेरी साँसों की आहट, लगती है इक सुकून, बिन कहे ही समझ लेते, मेरे हर एक जुनून। वो तेरा मुस्कुराना, वो तेरा पास आना, हर लम्हे को बना देता, इक ख़ूबसूरत तराना। कभी हाथों को थामे, यूँ ही चुपचाप चलना, कभी छोटी सी बात पर, तेरा रूठना और मनाना। ये सब बातें अब ज़िंद...
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Category: Relationships
इक खालीपन था पहले, ज़िंदगी की राहों में कहीं,
ढूँढता फिरता था दिल, अपनी मंज़िल थी नहीं।
अधूरी सी कहानी थी, अनकही कोई दास्तान,
जैसे कोई ख़्वाब था, पर ना था कोई निशाँ।
फिर इक रोज़ तुम आए, जैसे कोई सुबह हसीं,
रातों की ख़ामोशी में, जगी नई किरन कहीं।
ना थी कोई ख़बर, ना कोई पहले से पहचान,
पर तेरी एक नज़र से, बदला मेरा जहान।
लफ़्ज़ों से परे थी वो, पहली सी मुलाक़ात अपनी,
लगा जैसे बरसों से, मैं था तेरा ही इंतज़ार।
तेरी आँखों में मैंने, देखी अपनी परछाई,
रूह ने अपनी रूह को, पहचान लिया था उस रात।
वो पल ठहरा सा था, जैसे थम गया हो ज़माना,
जब दिल ने कहा 'मिल गया' मेरा सच्चा अफ़साना।
एक ऐसी डोर बँधी, जो नाज़ुक भी थी और मज़बूत भी,
जैसे दो किनारों को मिलाती, कोई बहती नदी।
अब तेरी साँसों की आहट, लगती है इक सुकून,
बिन कहे ही समझ लेते, मेरे हर एक जुनून।
वो तेरा मुस्कुराना, वो तेरा पास आना,
हर लम्हे को बना देता, इक ख़ूबसूरत तराना।
कभी हाथों को थामे, यूँ ही चुपचाप चलना,
कभी छोटी सी बात पर, तेरा रूठना और मनाना।
ये सब बातें अब ज़िंदगी का हिस्सा बन गई हैं,
जैसे हवा और पानी, जो हर दम साथ रहती हैं।
सुबह की पहली चाय से, रात की गहरी नींद तक,
तू ही है अब हर सोच में, हर एहसास में अब तक।
तेरे साथ है तो हर रंग, और भी गहरा लगता है,
तेरी मौजूदगी से मेरा, हर सपना सच लगता है।
ये पल, ये वक़्त, सब तुझमें समाए हैं,
मेरे हर ख़्वाब की, तू ही तो अब राह है।
तेरी आँखों में देखा है, मैंने अपना हर कल,
तेरे साथ है तो हर मुश्किल, लगती है सरल।
वक़्त ने बदले रंग, मौसम भी बदला है,
पर तेरा मेरा रिश्ता, यूँ ही अटल सा खड़ा है।
कभी आँसू भी आए, कभी राहें भी मुश्किल हुईं,
पर हर मोड़ पर मैंने, तुझमें पनाह ली।
तू मेरा सहारा है, तू ही मेरी हिम्मत,
तेरा हाथ थामे मैं, कर सकता हूँ हर जद्दोजहद।
जब लगे टूटने सा, ये दिल कभी मेरा,
तेरी आवाज़ बन जाती, जीने का आसरा।
ये दुनिया की बातें, ये लोगों के तकरार,
हमें छू भी न पाएँ, क्यूँ है ये दीवार?
क्यूँकि हमारे रिश्तों की, बुनियाद है सिर्फ़ प्यार,
जो हर इम्तेहाँ से बढ़कर, हर कसौटी पे रहा ख़रा।
हमने मिलकर बनाए हैं, अपने क़ायदों के जहाँ,
जहाँ सिर्फ़ अपनापन है, और नहीं कोई गुमाँ।
हर मुश्किल को हँसकर, हमने मिलकर पार किया,
हर अँधेरी रात में, इक दूजे का दीप जलाया।
तेरे संग सीखे हैं मैंने, ज़िंदगी के नए मायने,
मेरे हर अधूरेपन में, तूने ही तो रंग भरे हैं।
हम दोनों ने मिलकर, बुने हैं कई ख़ूबसूरत सपने,
जो सिर्फ़ हमारे हैं, किसी और के नहीं।
तेरी सोच में मेरा अक्स, मेरी सोच में तू है,
जैसे एक ही धुन के, दो अनमोल सुर हैं।
एक दूजे की ताक़त, एक दूजे की कमज़ोरी,
पूरी करते हैं हम, अपनी हर अधूरी कहानी।
ये सफ़र अभी जारी है, मंज़िल का पता नहीं,
पर तेरे साथ है तो, हर राह है हसीं।
न कोई फ़िक्र है अब, न कोई है गिला,
बस तेरा साथ हो, यही है हर दुआ।
हम एक दूजे में ढल गए हैं, ऐसे कि अब,
कोई हमें जुदा न कर पाए, न ही कोई रब।
हर सुबह तेरी आँखों से, मैं दुनिया को देखता हूँ,
हर रात तेरी बाहों में, मैं चैन से सोता हूँ।
तुझे प्यार कहूँ या, कहूँ अपनी इबादत,
तू ही है मेरा साज़, तू ही मेरी चाहत।
इस दिल की हर धड़कन, तेरा नाम लेती है,
मेरी साँसों में बसती, तेरी ही ख़ुशबू है।
शुक्रिया है उस रब का, जिसने तुम्हें मिलाया,
मेरी वीरान दुनिया में, फिर से गुल खिलाया।
तेरी मौजूदगी से है, हर चीज़ में अब चमक,
तू है तो सब कुछ है, तू नहीं तो सिर्फ़ झिझक।
ना सिर्फ़ हमसफ़र है, तू मेरी हमराज भी है,
मेरे अनकहे जज़्बों का, तू ही तो अलफ़ाज़ भी है।
रूह का रिश्ता है ये, जिस्मों से परे,
जो हर जन्म भी मेरा, तेरे ही नाम करे।
हाँ, यही तो प्यार है, जो अमर है, शाश्वत है,
हर लम्हा तेरे संग, एक मुक़म्मल आयत है।
मेरे हर कल में तुम हो, मेरे आज में भी तुम,
मेरी दुनिया की रौनक, मेरे जीने का दम।
ये गहरा एहसास है, जो अल्फ़ाज़ों से परे,
बस इतना समझ लो, हर साँस पे तू है मेरे।
📅 Published on Saturday, 25 April 2026 at 10:57:10 am
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